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प्रसव अवस्था

बच्चे के जन्म देने की प्रक्रिया को प्रसव कहते हैं। प्रसव के आसपास का समय मां और बच्चा दोनों के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। थोड़ी सी असावधानी भैंस और उसके बच्चे के लिए घातक हो सकती है, तथा भैंस का दूध उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

                   

                     प्रसव के समय जच्चा और बच्चा की देखभाल जरूरी



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बाह्य परीक्षण द्वारा गर्भधारण का अनुमान

कृत्रिम गर्भाधान के बाद यदि भैंस गाभिन हो जाती है तो निम्नलिखित लक्षण देखने को मिलते हैं जिससे हम एक बस अनुमान लगा सकते हैं। ये लक्षण निम्नलिखित हैं:-

Ø   गर्भधारण करने के बाद भैंसें साधारणतया गर्मी में नहीं आती है।

Ø   गर्भधारण करने के बाद भैंसें अधिक शांत हो जाती है।

Ø   गर्भधारण के शुरू के महीनों में भैंसों में चर्बी बढ़ने की प्रवृति (Fattening tendency)   देखने को मिलती है।

Ø   दूध उत्पादन में कमी जाती है।

Ø   शरीर का भार धीरे धीरे बढ़ने लगता है।

Ø   पेट का आकार भी धीरे धीरे बढ़ने लगता है।

Ø   कटड़ियों में लगभग 5-6 महीनों के बाद से ही थन का आकार बढ़ने लगता है जबकि मादा भैंसों में ये लक्षण प्रसव के 2-3 सप्ताह मात्र पहले देखने को मिलते हैं।

Ø   कुछ भैंसों में थन का आगे वाले भाग में सूजन गर्भ के अंतिम महीनों के दौरान देखने को मिलती है।

 
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